Theater Ads Scam: PVR INOX Case और दुनिया के 5 बड़े Lawsuits जिनसे बदला सिस्टम

PVR INOX Case: जरा सोचो आप मूवी देखने गए और मूवी शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं… लेकिन मूवी के बजाय 15-20 मिनट तक सिर्फ ऐड्स चलते रहते हैं! ज्यादातर लोग इस टॉर्चर को बर्दाश्त करते हैं! ऐसा सिर्फ आपके साथ नहीं हुआ, बल्कि दुनियाभर में लाखों दर्शकों के साथ हुआ, और उन्होंने इस पर केस कर दिया! आइए जानते हैं दुनिया भर के ऐसे बड़े मुकदमों के बारे में, जिन्होंने थिएटर और स्टूडियो के गलत प्रैक्टिसेज़ को एक्सपोज़ किया।

1) Abhishek ने किया PVR INOX पर केस

बेंगलुरु के Abhishek M.R. ने इस वजह से PVR INOX पर ही केस कर दिया था और अब वो केस जीत भी गए हैं। Abhishek ने शिकायत की कि उन्होंने जिस मूवी के लिए टिकट खरीदा था, वह काफी देर से शुरू हुई, क्योंकि थिएटर वाले excessive advertisements दिखा रहे थे। उनका कहना था कि इससे इर्रिटेशन भी होती है और दर्शकों के समय और पैसे की बर्बादी भी।

PVR INOX पर 1 लाख का जुर्माना 

बेंगलुरु जिला उपभोक्ता कोर्ट (Bangalore District Consumer Court) ने इस मामले को “Unfair Trade Practice” माना और PVR INOX पर ₹1 लाख का जुर्माना ठोक दिया! इतना ही नहीं, Abhishek को मानसिक परेशानी और कानूनी खर्चों के लिए ₹28,000 का मुआवजा भी दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि PVR INOX को टिकट पर मूवी शुरू होने का सही टाइम लिखना होगा। जरूरत से ज्यादा ऐड्स दिखाने की प्रैक्टिस को तुरंत रोकना होगा।

2) Motion Picture Advertising Service Co. केस

एक ऐसा ही मामला 1950s अमेरिका में हुआ था। हुआ यूँ था कि एक ऐड कंपनी ने थिएटरों के साथ exclusive contracts करके पूरी इंडस्ट्री को control करने की कोशिश की थी। लेकिन फिर FTC (Federal Trade Commission) ने इसे चैलेंज किया और मामला U.S. Supreme Court तक पहुंच गया!

Motion Picture Advertising Service Co. उस समय थिएटर इंडस्ट्री में सबसे बड़ी एडवरटाइजिंग कंपनी थी। उसने कई थिएटरों के साथ एक्सक्लूसिव डील्स कर रखी थीं, जिससे दूसरी ऐड कंपनियों को मार्केट में एंट्री का कोई चांस ही नहीं मिल रहा था। यह एक monopoly जैसा सेटअप बन गया था, जिसमें छोटे प्लेयर्स को बुरी तरह दबा दिया गया था। इसे देखते हुए Federal Trade Commission (FTC) ने इसपर केस कर दिया। 

फरवरी 1953  को U.S. Supreme Court ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने FTC के पक्ष में फैसला दिया और कहा कि यह Unfair Trade Practice है। कंपनी पर यह रोक लगाई गई कि अब वह किसी भी थिएटर के साथ 1 साल से ज्यादा का एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर सकती।

3) Loews Cineplex Entertainment Group पर केस (2003)

शिकागो की इंग्लिश टीचर Miriam Fisch ने शिकागो की एक कोर्ट में मूवीज में ऐड्स को लेकर केस किया था। क्योंकि उन्होंने देखा कि थिएटर में बताई गई मूवी टाइमिंग की बजाय 20- 25 मिनट की ऐड्स दिखाई जाती हैं! असल में फिल्म काफी देर बाद शुरू हो रही थी। उन्होंने यह केस Loews Cineplex Entertainment Group के खिलाफ किया था कि मूवी स्टार्ट टाइम को लेकर लोगों को गुमराह किया जाता है। Miriam और कई अन्य दर्शकों का मानना था कि लोग अपनी मूवी देखने के लिए समय से पहुँचते हैं, लेकिन थिएटर वाले बिना बताए जबरदस्ती ऐड्स दिखाते हैं।

इस पर class-action lawsuit फाइल हुआ था। जिस पर कोर्ट ने अपने फैसले में मांग की गई कि न सिर्फ इस पर, बल्कि शिकागो के हर थिएटर को मूवी टिकट पर सही स्टार्ट टाइम लिखना होगा। साथ ही क्लियर करना होगा कि ऐड्स कितने मिनट तक चलेंगे।

4) Universal Studios पर केस (2022)

इसमें में केस किया गया था, लेकिन यह मामला थोड़ा अलग था। असल में ट्रेलर में जिस एक्टर को दिखाया गया था, वो फिल्म में था ही नहीं! Universal Studios की मूवी “Yesterday” के ट्रेलर में Ana de Armas को दिखाया गया था, जिससे कई फैंस इस मूवी को देखने के लिए excited हो गए। लेकिन जब मूवी रिलीज़ हुई, तो पता चला कि Ana de Armas का एक भी सीन फिल्म में नहीं था! इसके बाद Conor Woulfe और Peter Michael Rosza ने इस पर केस कर दिया और आरोप लगाया कि यह deceptive advertising है।

हालंकि Universal Studios ने पहले इसे अपनी पावर से दबाने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे मिसलीडिंग ऐडवरटाइजिंग माना और केस को आगे बढ़ाने का आदेश दिया। यह एक बड़ा लीगल प्रिसिडेंट बना, क्योंकि अब फिल्म स्टूडियोज़ ट्रेलर में गलत या भ्रामक कंटेंट नहीं दिखा सकते।

5) अमेरिका की 2 बड़ी सिनेमा ऐड कंपनियों पर civil suit?

यह केस ऑडियंस से ज्यादा अड्वॅरटीज़मेंट इंडस्ट्री से जुड़ा था। असल में 2014 में 2 कंपनियां पूरे थिएटर ऐड मार्केट को कंट्रोल करने करनी लगी थी? जिससे ऐड के रेट बढ़ जाते, ऐड क्वालिटी गिर सकती थी और छोटे प्लेयर्स के पास कोई मौका ही नहीं बचता, लेकिन अमेरिका की सरकार ने ऐसा होने से रोक लिया। 

असल में 2 बड़ी सिनेमा ऐड कंपनियां National CineMedia Inc. और Screenvision LLC मर्जर करने जा रही थीं, लेकिन U.S. Justice Department ने इसे रोक दिया! यह दोनों कंपनियां सिनेमा इंडस्ट्री में सबसे बड़ी ऐड कंपनियां थीं। इनका मर्जर मतलब था कि थिएटर विज्ञापन इंडस्ट्री पर सिर्फ एक ही कंपनी का राज होगा! यह मोनोपोली छोटे ऐडवर्टाइजर्स और थिएटर मालिकों के लिए बुरा साबित हो सकता था। इसके खिलाफ जस्टिस डिपार्टमेंट ने civil suit दर्ज किया था। कोर्ट ने इस कंपनियों को मर्ज होने से रोका, जिससे थिएटर एड मार्केट में कॉम्पिटिशन बना रहा। छोटे ऐड प्लेयर्स को मौका मिला और थिएटर मालिकों के पास ज्यादा ऑप्शन्स आए। 

थिएटर में ऐड्स दिखाने की प्रैक्टिस नई नहीं है, लेकिन जब यह दर्शकों के अधिकारों और अनुभव पर असर डालने लगे, तो यह सिर्फ एक बिजनेस स्ट्रेटजी नहीं, बल्कि एक लीगल और एथिकल इशू बन जाता है। इन 5 बड़े मामलों ने दुनिया को दिखाया कि कैसे ऑडियंस के धैर्य की परीक्षा ली जाती रही है, और जब चीजें हद से पार हो गईं, तो लोगों ने आवाज उठाई। चाहे बात बेंगलुरु के दर्शकों के अधिकारों की हो, अमेरिका में थिएटर स्टार्ट टाइम के धोखे की, या फिर मिसलीडिंग ट्रेलर और मोनोपोली के खिलाफ कानूनी लड़ाई की – इन सभी मामलों ने साबित किया कि कानूनी रूप से दर्शकों के पास अपने हक की रक्षा करने की पावर होती है।

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