Tamil Nadu Liquor Ban 2025: BJP Protest, TASMAC और Liquor Policy का पूरा सच

Breaking News: तमिलनाडु में शराब नीति (Tamil Nadu Liquor Ban 2025) को लेकर बड़ा बवाल मचा है। हाल ही में BJP नेताओं तमिलिसाई सुंदरराजन और वनाथी श्रीनिवासन को TASMAC मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करने से पहले गिरफ्तार कर लिया गया। सवाल यह है – TASMAC को लेकर इतना हंगामा क्यों हो रहा है? क्या तमिलनाडु में शराबबंदी होनी चाहिए या सरकार का यह कदम सही है? चलिए, इस पूरे मुद्दे को डीटेल में समझते हैं।

Tamil Nadu Liquor Ban 2025?

तमिलनाडु में शराब को लेकर हमेशा से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस रही है। तो आइए जानते हैं, ये पूरा मामला आखिर है क्या? 1950s-1970s में शराबबंदी लागू की गयी थी, लेकिन अवैध शराब और तस्करी की घटनाएँ बढ़ने लगीं। 1983 में सरकार ने Tamil Nadu State Marketing Corporation (TASMAC) शुरू किया, ताकि शराब बिक्री को गवर्नमेंट कंट्रोल में लाया जाए और अवैध शराब की समस्या को कम किया जाए। इसके बाद जयललिता सरकार ने TASMAC स्टोर्स को रेगुलेट किया, लेकिन शराब से जुड़े अपराध और सामाजिक समस्याएँ बढ़ती चली गईं। यह देखकर 2016 में जयललिता सरकार ने TASMAC की कुछ दुकानें बंद करने का फैसला लिया, लेकिन पूरी तरह शराबबंदी लागू नहीं की। और अब 2025 में शराबबंदी की मांग तेज़ हो गई, और सरकार पर दबाव बढ़ने लगा।

TASMAC: सरकारी शराब की दुकानें

अब सवाल उठता है कि TASMAC आखिर इतना हल्ला क्यों किया जा रहा है?TASMAC से तमिलनाडु सरकार को भारी कमाई होती है, 2023 में सरकार ने इससे ₹44,000 करोड़ का रेवेन्यू कमाया। सरकार का कहना है कि अगर शराबबंदी लागू की गई, तो अवैध शराब तस्करी बढ़ जाएगी। लेकिन इसके नुकसान भी हैं! लोग मानते हैं कि TASMAC की वजह से नशे की लत, घरेलू हिंसा और अपराध बढ़ रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए – पैसा या जनता की सेहत? यही सवाल विरोधियों का है!

Tamil Nadu BJP protest

BJP नेताओं का आरोप है कि TASMAC दुकानों के कारण corruption, (TASMAC corruption) शराब की लत बढ़ रही है, महिलाओं पर घरेलू हिंसा बढ़ रही है और युवा नशे में डूब रहे हैं। DMK सरकार का बचाव में यह कहना है कि TASMAC एक नियंत्रित सिस्टम है, जो अवैध शराब को रोकता है और राजस्व का बड़ा स्रोत भी है। कुछ लोग शराबबंदी चाहते हैं, तो कुछ लोग मानते हैं कि सरकार को शराब को सही तरीके से रेगुलेट करना चाहिए।

तमिलनाडु Vs अन्य राज्यों की शराब नीति

  • बिहार: 2016 से शराबबंदी लागू, लेकिन अवैध शराब की तस्करी जोरों पर है!
  • गुजरात: देश का पहला ड्राई स्टेट, लेकिन यहाँ भी ब्लैक मार्केट खूब फल-फूल रहा है।केरल: शराब बिक्री सीमित की गई है, लेकिन पूरी तरह बैन नहीं है।
  • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश: शराब पर अलग-अलग टैक्स लगाकर इसे रेगुलेट किया जाता है।

Illegal liquor: 120 लोगों की मौत

यह बवाल पहली बार नहीं हुआ। 2008 में कांचीपुरम में illegal liquor पीने से 120 लोगों की मौत हो गयी थी, यह उस वक था राज्य के सबसे बड़े एक्सीडेंट्स में से एक था। 2016 में जयललिता सरकार ने TASMAC स्टोर्स को कम करने का फैसला किया, लेकिन पूरा बैन नहीं लगाया। 2023 में अवैध शराब के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापेमारी, लेकिन फिर भी समस्या बनी रही। 2025 में BJP नेताओं द्वारा बड़े विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे सरकार पर शराबबंदी लागू करने का प्रेशर है।

अगर शराबबंदी हो (Tamil Nadu Liquor Ban 2025), तो शराब से जुड़ी बीमारियाँ, घरेलू हिंसा और अपराध कम होंगे। राज्य में युवा पीढ़ी नशे से दूर रहेगी और सामाजिक माहौल सुधर सकता है। लेकिन अन्य राज्यों की तरह अवैध शराब और ब्लैक मार्केट बढ़ सकता है। सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होगा। टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री पर नेगेटिव असर पड़ सकता है।तमिलनाडु में शराब नीति एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुकी है। TASMAC का विरोध, BJP नेताओं की गिरफ्तारी और जनता के गुस्से ने इस मुद्दे को और भी गरमा दिया है। सवाल यह है कि क्या तमिलनाडु में शराबबंदी होनी चाहिए? या सरकार को शराब को रेगुलेट करके एक संतुलन बनाना चाहिए?

 

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