Breaking News: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court on Indian BPL) ने सवाल उठाया है कि अगर भारत में प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) बढ़ रही है, तो गरीबों की संख्या अभी भी इतनी ज़्यादा क्यों है? सरकार का कहना है कि गरीबी कम हो रही है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है। क्या हमारे गरीबी मापने के तरीके outdated हो चुके हैं? या फिर गरीबों की असली संख्या को कम करके दिखाया जा रहा है?
Supreme Court on Indian BPL: Criteria outdated?
सरकार गरीबी मापने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती रही है, लेकिन क्या ये वास्तव में आज के समय में लागू होते हैं?
- तेंदुलकर समिति (2009): अगर कोई व्यक्ति ₹33/दिन (ग्रामीण) या ₹47/दिन (शहरी) खर्च कर सकता है, तो उसे गरीब नहीं माना जाता।
- रंगराजन समिति (2014): इस सीमा को बढ़ाकर ₹49/दिन (ग्रामीण) और ₹78/दिन (शहरी) कर दिया गया।
- Multidimensional Poverty Index (MPI): सिर्फ आय ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, और रहन-सहन के आधार पर भी गरीबी मापी जाती है।
क्या आज के टाइम में रोज़ ₹78 रुपए कमाने वाला व्यक्ति, और शहरों में रहता है, क्या अपना गुज़ारा कर सकता है? 2024 में ₹78 में सिर्फ एक टाइम की decent quality meal, थोड़ा सा मोबाइल डेटा, और लोकल ट्रांसपोर्ट ही मिल सकता है! अब बताइए, क्या ये गरीबी से बाहर आने के लिए काफी है?
असली गरीबी कितनी गहरी है?
आज इतनी महंगाई (Inflation) हो चुकी है। खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें 2024 में 20% तक बढ़ गई हैं। गैस सिलेंडर ₹1000 से ज़्यादा का हो गया, दूध ₹60+ लीटर हो गया, और सब्ज़ियाँ महंगी होती जा रही हैं। ऊपर से CMIE (Centre for Monitoring Indian Economy) के अनुसार, भारत की बेरोज़गारी दर 8% से ऊपर है। ग्रामीण भारत में 40% से ज्यादा युवा बेरोज़गार हैं, जिनके पास कोई permanent source का स्रोत नहीं है।
किसानों की आमदनी नहीं बढ़ रही है, लेकिन खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है।MSP (Minimum Support Price) के मुद्दों के कारण किसान कर्ज़ में डूबे हुए हैं।
सरकारी डेटा कहता है कि गरीबी कम हो रही है, लेकिन PM Awas Yojana, Ration Scheme और NREGA जैसी योजनाओं पर निर्भर रहने वालों की संख्या आज भी करोड़ों में है।
“Ration Cards और हकीकत?
क्या सब्सिडी सही लोगों तक पहुँच रही है? सरकार Public Distribution System (PDS) के तहत गरीबों को राशन और सब्सिडी देती है, लेकिन क्या यह सच में ज़रूरतमंदों तक पहुँच रही है? क्या BPL परिवारों को उनका हक मिल रहा है? “हमारा नाम BPL लिस्ट में नहीं है, इसलिए हम सरकारी योजनाओं से वंचित हैं।” – उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र से एक महिला। वहीँ बिहार के एक मज़दूर ने कहा कि “राशन कार्ड होने के बावजूद, हमें पूरा अनाज नहीं मिलता, और कई बार कोटे वाले पैसे माँगते हैं।” ऐसे ही कई और मामले होंगे।
- कागज़ी कार्यवाही और भ्रष्टाचार: गरीबों को राशन कार्ड बनवाने में महीनों लग जाते हैं।
- काला बाज़ारी: कई राशन दुकानदार सब्सिडी वाला राशन प्राइवेट मार्केट में बेच देते हैं।
- डिजिटल गैप: गरीबों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट नहीं होने से उन्हें राशन से वंचित किया जाता है।
One Nation, One Ration Card: इससे प्रवासी मज़दूरों को किसी भी राज्य में राशन मिल सकता है। Biometric Verification से फर्जी राशन कार्ड और घोटालों पर रोक लग सकती है। Direct Benefit Transfer (DBT) राशन की बजाय गरीबों के बैंक खातों में सीधे पैसे भेजने का सिस्टम। कई राज्यों में PDS को AI-Driven बनाया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जा सके। लेकिन, क्या यह सबके लिए accessible है?
असल में गरीबी रेखा की मौजूदा परिभाषा outdated हो चुकी है और इसे update करने की जरूरत है। सरकारी योजनाओं को grassroots level पर बेहतर तरीके से लागू करना होगा। PDS सिस्टम को digital और corruption-free बनाने की जरूरत है, लेकिन डिजिटल डिवाइड को भी ध्यान में रखना होगा। गरीबों की असली ज़रूरतों को समझते हुए, सरकार को योजनाओं में flexibility लानी होगी।
FAQs
> भारत में गरीबी को कैसे मापा जाता है?
भारत में गरीबी को तेंदुलकर समिति, रंगराजन समिति, और मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) के आधार पर मापा जाता है।
> क्या भारत में गरीबी वाकई कम हो रही है?
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि गरीबी घटी है, लेकिन महंगाई, बेरोजगारी और PDS सिस्टम की समस्याएँ असली तस्वीर कुछ और दिखाती हैं।
> One Nation One Ration Card स्कीम कितनी प्रभावी है?
यह प्रवासी मजदूरों को देशभर में राशन लेने की सुविधा देता है, लेकिन इसके डिजिटल सिस्टम की वजह से कई गरीब लोग इससे बाहर रह जाते हैं।
> BPL लिस्ट में नाम कैसे जोड़ा जा सकता है?
इसके लिए राज्य सरकारों की वेबसाइट पर आवेदन किया जा सकता है, लेकिन प्रक्रिया जटिल और भ्रष्टाचार से भरी हो सकती है।
> क्या सभी गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है?
नहीं, कई गरीब बिना राशन कार्ड या आधार कार्ड के इन योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।
> क्या भारत में गरीबी रेखा की परिभाषा बदलने की जरूरत है?
हाँ, क्योंकि ₹78/दिन की सीमा 2024 की महंगाई दर के हिसाब से बहुत कम है।
> क्या PDS सिस्टम में सुधार की जरूरत है?
हाँ, भ्रष्टाचार और काला बाज़ारी को रोकने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और AI सिस्टम लागू करने की जरूरत है।
> सरकारी योजनाओं में सबसे ज़्यादा लाभकारी कौन-सी स्कीम है?
NREGA, PM Awas Yojana, और DBT स्कीम गरीबों के लिए सबसे ज़्यादा फायदेमंद रही हैं।
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