Breaking News: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule in Manipur) लागू हो गया है। मणिपुर पिछले एक साल से गंभीर हिंसा और तनाव से जूझ रहा है। यहां के दो बड़े समुदाय मैतेई (Meitei) और कुकी (Kuki) के बीच संघर्ष चल रहा है। कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही थी और सरकार इसे संभालने में नाकाम हो रही थी। इसी वजह से केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा और राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा।
क्या है राष्ट्रपति शासन?/ President’s Rule in Manipur
जब किसी राज्य की सरकार सही तरीके से काम नहीं कर पाती, तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 (Article 356) के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है। मतलब, राज्य सरकार को हटा दिया जाता है और केंद्र सरकार सीधा कंट्रोल ले लेती है। राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटा दिया जाता है। गवर्नर, जो केंद्र सरकार के प्रतिनिधि होते हैं, राज्य का प्रशासन संभालते हैं। विधानसभा या तो भंग कर दी जाती है या उसे सस्पेंड कर दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि अब से मणिपुर की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज, सब सीधे सीधे केंद्र कण्ट्रोल करेगी।
3 साल से ज्यादा समय रह सकता है राष्ट्रपति शासन
भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति शासन छह महीने के लिए लागू किया जाता है। यदि ज़रूरत हो, तो इसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए हर छह महीने में संसद की मंजूरी लेना जरूरी होता है। इसके अलावा, अगर देश में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) लागू है, तो राष्ट्रपति शासन तीन साल से अधिक भी जारी रह सकता है। जब राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, तो केंद्र सरकार को राज्य की विधानसभा भंग करने का अधिकार नहीं होता, बल्कि केवल सस्पेंड (suspend) कर सकती है। इस दौरान, राज्य में प्रशासनिक फैसले पूरी तरह से केंद्र सरकार और राज्यपाल के हाथ में होते हैं।
मणिपुर में क्यों लिया गया फैसला?
मणिपुर में हिंसा और तनाव लगातार बढ़ रहा था। राज्य की सरकार इसे संभालने में पूरी तरह असफल हो गई थी। लोगों की जान-माल को खतरा था, कई जगहों पर दंगे और झड़पें हो रही थीं। प्रशासन की विफलता और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से यह जरूरी हो गया कि केंद्र सरकार सीधे हस्तक्षेप करे। मुख्य कारण ये थे:
- जातीय संघर्ष (Ethnic Conflict): मैतेई और कुकी समुदायों के बीच विवाद गहराता गया।
- कानून-व्यवस्था का फेल होना: लगातार हिंसा, लूटपाट और दंगों ने आम जनता को असुरक्षित कर दिया।
- राजनीतिक अस्थिरता: सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के कारण कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका।
- अवैध घुसपैठ और उग्रवाद: बॉर्डर से हो रही घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) के इतिहास में यह 11वीं बार है जब राज्य में केंद्रीय शासन लागू किया गया है। प्रत्येक अवसर पर विभिन्न राजनीतिक अस्थिरताओं और कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण राष्ट्रपति शासन लगाया गया। नीचे मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के लागू होने के सटीक वर्ष और उनकी अवधि दी गई है:
-
12 जनवरी 1967 से 19 मार्च 1967: मुख्यमंत्री मैरेम्बम कोईरेंग सिंह के इस्तीफे के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
-
25 अक्टूबर 1967 से 18 फरवरी 1968: मुख्यमंत्री लोंगजम थम्बौ सिंह के संक्षिप्त कार्यकाल के बाद उत्पन्न राजनीतिक गतिरोध के कारण राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
-
17 अक्टूबर 1969 से 21 जनवरी 1972: बढ़ती उग्रवाद और राज्य के दर्जे की मांग के कारण कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के चलते राष्ट्रपति शासन लागू रहा।
-
28 मार्च 1973 से 3 मार्च 1974: राजनीतिक अस्थिरता और विधायकों के दल-बदल के कारण सरकार बर्खास्त की गई, जिससे केंद्रीय शासन की आवश्यकता पड़ी।
-
16 मई 1977 से 28 जून 1977: आंतरिक राजनीतिक कलह और सरकार के पतन के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
-
14 नवंबर 1979 से 13 जनवरी 1980: मुख्यमंत्री यांगमासो शाइज़ा की सरकार के पतन के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
-
28 फरवरी 1981 से 18 जून 1981: मुख्यमंत्री रिशांग किशिंग की सरकार के पतन के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
-
7 जनवरी 1992 से 8 अप्रैल 1992: मुख्यमंत्री राजकुमार रणबीर सिंह की सरकार के पतन के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
-
31 दिसंबर 1993 से 13 दिसंबर 1994: राजनीतिक अस्थिरता और सरकार के पतन के कारण राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
-
2 जून 2001 से 6 मार्च 2002: मुख्यमंत्री राधाबिनोद कोइजम की सरकार के पतन के बाद कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के चलते राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
-
13 फरवरी 2025 से वर्तमान: मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह के इस्तीफे और राज्य में जारी जातीय हिंसा के कारण राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
अब तक इन राज्यों में लगा President’s Rule
भारत के किसी राज्य पर राष्ट्रपति शासन पहली बार नहीं लगा है, भारत में कई बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। कुछ बड़े उदाहरण इस प्रकार हैं। साल 2005 में विधानसभा में सरकार न बन पाने के कारण बिहार में राष्ट्रपति शासन लागु हुआ था, जबकि उत्तराखंड में 2016 में ऐसा देखने को मिला था, जिसकी वजह भी राजनीतिक अस्थिरता थी। इसके अलावा बीते कुछ सालों की बात करें, तो महाराष्ट्र में साल 2019 में राष्ट्रपति शासन लगा था, वहां पर इसे सरकार के न बनने की वजह से लगाया गया था। वहीँ उसी साल यानी 2019 में ही कर्नाटक में भी ऐसा हुआ था, जिसके पीछे कारण था- बहुमत साबित न कर पाना।
कुछ मामलों में स्थिति सुधर गई, लेकिन कई बार लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रही। अब देखना होगा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन कितने समय तक रहता है और इसका क्या असर होता है। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद तीन संभावनाएँ हैं! अगर हालात सुधरते हैं, तो केंद्र सरकार जल्द चुनाव करवा सकती है। अगर स्थिति खराब बनी रहती है, तो लंबे समय तक केंद्र सरकार का नियंत्रण रहेगा। अगर राजनीतिक पार्टियां एक साथ आकर सरकार बनाने के लिए सहमत हो जाती हैं, तो एक नई सरकार बनाई जा सकती है।
“लोकतंत्र पर हमला”: कांग्रेस
इस फैसले पर भी पॉलिटिक्स जारी है। बीजेपी का कहना है कि यह फैसला राज्य में शांति बहाल करने के लिए ज़रूरी था। वहीँ कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है, और कहा है कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक सरकारों को कमजोर कर रही है। हालाँकि स्थानीय नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।
Latest News In Hindi
Natco Pharma Q3 Results: शेयर में 19% गिरावट; Regulatory Issues या Market Slowdown?
अस्वीकरण: Dhara Live पर उपलब्ध लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए हैं, जिसे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्लेटफ़ॉर्म से लिया गया है। हालाँकि हम सटीकता के लिए प्रयास करते हैं, लेकिन हम जानकारी की पूर्णता, प्रामाणिकता या समयबद्धता की गारंटी नहीं देते हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत राय हैं और उन्हें कानूनी, वित्तीय या पेशेवर सलाह नहीं माना जाना चाहिए। पाठकों को निर्णय लेने से पहले तथ्यों को सत्यापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। Dhara Live इस सामग्री के आधार पर किसी भी नुकसान, गलत व्याख्या या कार्रवाई के लिए उत्तरदायी नहीं है।