Mumbai Tandoor Ban: मुंबई में ट्रेडिशनल तंदूर ओवन को बैन करने का प्रस्ताव सामने आया है और इसने शेफ्स, रेस्टोरेंट मालिकों और फूड लवर्स को चिंता में डाल दिया है। BMC (Brihanmumbai Municipal Corporation) ने प्रस्ताव दिया है कि चारकोल से चलने वाले तंदूर अब शहर के रेस्टोरेंट्स और ढाबों में नहीं चलाए जा सकते। इसकी वजह है वायु प्रदूषण! लेकिन शेफ्स और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि गाड़ियों और फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को नजरअंदाज कर, सिर्फ तंदूर पर बैन लगाना जायज नहीं है। इस फैसले से मुंबई के फूड कल्चर पर गहरा असर पड़ेगा।
8 जुलाई 2025 तक तंदूर बंद करने का आर्डर
- BMC का कहना है कि चारकोल से जलने वाले तंदूर से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ाता है।
- 8 जुलाई 2025 तक सभी रेस्टोरेंट्स को गैस या इलेक्ट्रिक तंदूर में स्विच करने का आदेश दिया गया है।
- BMC के अधिकारियों का मानना है कि यह फैसला स्वच्छ हवा और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।
रेस्टोरेंट्स और होटल मालिकों का कहना है कि तंदूर बैन के कारण उनका बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। मुंबई की कई नामी जगहों जैसे लखनऊ तंदूरी हाउस, दिल्ली कबाब कॉर्नर और तंदूर विला के शेफ्स का कहना है कि “अगर तंदूर नहीं रहेगा, तो तंदूरी चिकन, नान, कबाब और कई फेमस डिशेज़ का असली स्वाद खत्म हो जाएगा!” ट्रेडिशनल तंदूर से स्मोकी फ्लेवर आता है, जो गैस और इलेक्ट्रिक तंदूर से नहीं मिल सकता। रेस्टोरेंट इंडस्ट्री का कहना है कि यह उनके कारोबार पर सीधा असर डालेगा। चारकोल सप्लायर्स, तंदूर बनाने वाले और छोटे रेस्टोरेंट्स के लिए यह बड़ा झटका होगा।
क्या पहले भी तंदूर बैन की कोशिश हुई है?
2019 में दिल्ली में भी तंदूर बैन करने की कोशिश हुई थी, लेकिन जबरदस्त विरोध के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। 2023 में मध्य प्रदेश सरकार को भी ऐसा प्रस्ताव देना पड़ा था, लेकिन बाद में सफाई दी गई कि कोई बैन नहीं लगेगा। पाकिस्तान में भी तंदूर के धुएं को लेकर प्रतिबंध लगाने की बात चली थी, लेकिन इसे भी लागू नहीं किया गया। इतिहास बताता है कि हर बार जब तंदूर पर बैन लगाने की बात होती है, तो जनता का भारी विरोध इसे रोक देता है।
क्या सच में तंदूर प्रदूषण बढ़ाता है?
BMC का तर्क है कि चारकोल जलाने से वायु प्रदूषण होता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या तंदूर से ज्यादा गाड़ियों और फैक्ट्रियों से प्रदूषण नहीं होता? क्या मुंबई की हवा साफ करने के लिए तंदूर ही सबसे बड़ी समस्या है? क्या सरकार कोई और सस्टेनेबल सॉल्यूशन नहीं निकाल सकती? फूड इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग मानते हैं कि अगर पर्यावरण को लेकर चिंता है, तो अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए, न कि सिर्फ तंदूर पर बैन लगाने का फैसला लेना चाहिए।
फिलहाल रेस्टोरेंट मालिक और शेफ्स इस बैन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। अगर BMC इस बैन को लागू करती है, तो हो सकता है कि इसे कोर्ट में चुनौती दी जाए। सरकार को यह तय करना होगा कि कैसे पारंपरिक फूड कल्चर और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जाए।
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